अंधेरे में छिपी आवाज़

हेलो कैसे हो साथियों मैं मिस्टर एक्स आज आपके लिए एक और गांव से जुड़ी हुई बहुत ही भयानक और बहुत ही ज्यादा दिल को दहला देने वाली घटना लेकर के आया हूं इस घटना को सुनने के लिए आपका कलेजा मजबूत होना चाहिए तो आज की घटना मेरे पास आई है हिमाचल से जी हां वही हिमाचल जहां घाटियां हैं खूबसूरती है और उन घाटियों में हर कोई खोना चाहता है उस शांति को हर कोई पाना चाहता है लेकिन उन्हीं पहाड़ों और घाटियों की शांति के पीछे ऐसी चीजें भी रहती हैं जो आपकी शांति को अशांत कर सकती हैं हिमाचल में एक छोटा सा गांव है उसी गांव में घटी हुई यह भयानक घटना है और यह आज से नहीं बल्कि काफी समय पहले घटी हुई है लगभग आप मान सकते हो 20 से 30 साल पहले की अब देखिए काफी लोग तो इस घटना को सुनकर कह सकते हैं कि भाई इतनी ज्यादा डरावनी कोई घटना हो ही नहीं सकती तुम फेक कहानी सुना रहे हो तो देखो मानने वाले लोग तो हर कहानी को भी फेंक मानते हैं बट जिनको इन चीजों में यकीन है वह जानते हैं कि ऐसा एक्चुअल में होता है तो उस गांव के अंदर क्या था कि एक लड़का होता है जिसको यह शौक छड़ता है कि मुझे ज्यादा पैसे कमाने हैं क्योंकि उनके गांव में लोग वहां के लोकल काम ही किया करते थे जैसे सब्जी वगैरह बेचने का लेकिन वह सोचता है कि मैं शहर में जाऊं और अच्छे पैसे कमाऊं तो तो वहां पर उसे एक काम मिल जाता है ट्रक ड्राइविंग का और इसकी किस्मत भी ऐसी ही होती है कि जब वह पहली बार उस ट्रक को लेकर काम पर निकलता है और पहली बार ही उसके साथ बहुत ही खतरनाक हादसा हो जाता है और उस आदमी को एहसास भी नहीं होता है कि उसके साथ कौन सी बला लग चुकी है वह तो उस बला की खूबसूरती में इतना खो जाता है कि उसे पता ही नहीं होता कि वह किस बला को अपने साथ बैठाकर घर के अंदर प्रवेश कर चुका है और अगर सही समय पर उसके घर वाले या आसपास के लोग उस चीज पर गौर नहीं करते तो उस बंदे की जान जाना तय थी क्योंकि जिस बवाल को वह अपने साथ घर पर लेकर आ गया था वह जवान लड़कों के खून की प्यासी थी और एक दो बार तो उसका खून भी उसने चूस भी लिया था तो चलिए स्टोरी शुरू कर रहे हैं अच्छा जो भी साथी पहली बार आए हैं तो वोह चैनल को सब्सक्राइब करके हमारी इस फैमिली से जुड़ जाइए हम इस फैमिली को बहुत ही बड़ी करना चाहते हैं एक ऐसी फैमिली जो इन सभी चीजों पर डिस्कशन करेगी और इन चीजों में कुछ नई बातें आपको जानने को भी मिलेगी ताकि कभी आपके सामने ऐसी परिस्थिति आ जाए तो आप उनसे कैसे डील कर सकें तो हिमाचल का यह एक छोटा सा गांव था कसौनी अब तो गांव बहुत ही छोटा था लेकिन वहां रहने वाले बड़े प्रेम प्यार से मिलजुल के रहते थे उनका जीवन बहुत ही सीधा सरल था गांव वाले अपने गांव के आसपास के जंगल लो से लकड़ियां फल और जड़ी बूटियां इकट्ठे करके उन्हें पड़ोस वाले कस्बे के बाजार में बेच आते इन चीजों को बेच के उन्हें जो कुछ भी पैसा मिलता उससे वहीं कस्बे के बाजार से ही अपनी जरूरत की चीजें खरीद के ले आते और हंसते मुस्कुराते अपनी जिंदगी बिताते कभी भी उन गांव वालों के दिलों में दूर शहर जाने या कहीं दूसरी जगह जाकर कुछ नौकरी चाकरी करने का ख्याल नहीं आता बहुत ही छोटी-छोटी खुशियों में खुश होकर जीने वाले थे यह लोग लेकिन उसी गांव के एक पुराने बाशिंदे रामलाल के जवान बेटे सोमनाथ के दिल में गांव से कहीं बाहर जाकर कुछ बड़ा काम ढूंढने और ढेर सारे पैसे कमाने का ख्याल उभरने लगा सोमनाथ फौरन अपने दोस्त के बताए पते पर जाकर उस ठेकेदार से मिला और उसके ट्रक का ड्राइवर बनने की ख्वाहिश जताई ठेकेदार ने सोमनाथ से पूछा तुमने कभी माल से लदे ट्रक को चलाया है रात में चला लोगे ट्रक सोमनाथ ने बिना देर किए हामी भरते हुए कहा जी बाबू जी मैं बहुत अच्छे से चला सकता हूं ट्रक पर अभी मेरे पास कोई लाइसेंस वगैरह नहीं है ठेकेदार हंसते हुए बोला अरे लाइसेंस की उतनी जरूरत नहीं है क्योंकि वैसे भी तुझे ट्रक उस जंगल में लेकर जाना है जिधर कोई पुलिस उलिस नहीं रहती जांच पड़ताल करने के लिए सोमनाथ को जब ठेकेदार ने एडवांस में 000 दिए तो वह तो खुशी से झूम उठा उसने तो आज से पहले कभी 00 भी एक साथ नहीं देखे थे फिर ठेकेदार ने सोमनाथ को ट्रक की चाबी देते हुए अच्छे से समझाया तुम शाम को 5:00 बजे ट्रक लेकर इस कस्बे के बाहर वाली कच्ची सड़क पर होते हुए सीधे वहां पहुंचना जहां पर पहाड़ी झरना है उस झरने के पास से फिर तुम्हें ट्रक को बाई और वाले जंगल की तरफ मोड़ना है वहां से करीब-करीब एक घंटे के सफर के बाद फिर तुम उस इलाके में पहुंच जाओगे जहां पर मेरा छिपा हुआ गोदाम है वहां पर मेरे कुछ आदमी भी मौजूद रहेंगे जो इस ट्रक पर लदे माल को खाली करके गोदाम में भर देंगे उसके बाद फिर तुम खाली ट्रक लेकर वापस मेरे पास चले आना और अपने पैसे ले जाना तुम्हें हफ्ते में दो बार ट्रक लेकर जाना होगा और हर हफ्ते में पूरे 000 तुम्हें दूंगा तुम आज ही शाम से यह काम करना शुरू कर दो इस हफ्ते के पैसे तो तुम्हें एडवांस दे ही चुका हूं सोमनाथ को जब महीने के 00 मिलते दिखे तो वह खुशी से बावरा हो गया उसने ठेकेदार से ट्रक की चाबी ली और फिर ट्रक की ड्राइविंग सीट पर बैठ के उसने वहीं दो एक चक्कर मार के ठेकेदार को दिखाए और फिर माल से भरे ट्रक को लेकर वह रवाना हो गया उस ठेकेदार के बताए पते पर शाम हो चली थी वैसे तो अभी शाम के 5 ही बजे थे पर पहाड़ी जगह होने की वजह से सूरज तेजी से छिपता जा रहा था और शाम का अंधेरा बढ़ता ही जा रहा था सोमनाथ मन ही मन सोचने लगा मुझे गोदाम तक पहुंचने और वहां से वापस ठेकेदार के पास तक पहुंचने में ज्यादा से ज्यादा चार पांच घंटे लगेंगे फिर मैं ठेकेदार से कोई साइकिल वगैरह मांग के उस पर बैठ अपने घर चला जाऊंगा बापू तो 5000 की रकम देखते ही खुशी से मुझे गले लगा लेंगे सोमनाथ बड़ी सावधानी से गाड़ी चला रहा था उबड़ खाबड़ सड़क पर ट्रक चलाते हुए थोड़ी अड़चन हो रही थी जब वह जंगल के अंदर बने उस सीक्रेट गोदाम तक पहुंचा तब तक रात के 9:00 बज चुके थे गोदाम में मौजूद लोग ट्रक में लदा माल उतारने लगे जब तक पूरा माल उतारा गया तब तक 11 बजे हो गए थे सोमनाथ को अब तक बड़े जोरों से भूख लगने लगी थी उसने दोपहर के बाद से अब तक कुछ भी नहीं खाया था फिर उसने माल उतार रहे उन लोगों से कुछ खाने पीने के लिए मांगा तो उन्होंने उसे एक लोटे में पानी और एक रोटी दे दी भूखे प्यासे सोमनाथ ने तुरंत वह पावरोटी खाकर लोटा भर पानी पी लिया फिर सोचने लगा अब तो ट्रक खाली हो गया है मैं इसे तेज गति से भगाते हुए ले जाऊंगा आखिर पौने बजे जाके कहीं सोमनाथ वापस ट्रक में बैठा और वहां से ठेकेदार के गांव की तरफ जाने के लिए रवाना हुआ रात अब तक बहुत गहरा चुकी थी सोमनाथ को बड़ी थकान सी लग रही थी और नींद भी बहुत आ भी रही थी आख खिर सोमनाथ नींद से बेहाल हो गया और आधे रास्ते में ही जंगल में अपना ट्रक एक किनारे खड़ा करके ड्राइविंग सीट पर ही सो गया कुछ ही मिनटों में उसे एकदम गहरी नींद आ गई लेकिन करीब डेढ़ दो घंटे बाद अचानक ही कुछ अजीब सी रोने सि सकने की आवाज सुनकर उसकी नींद खुल गई हड़बड़ा हुए सोमनाथ ने इधर-उधर देखा तो उसे ट्रक से थोड़ी दूर पर एक युवती खड़ी हुई दिखी वो युवती बड़ी ही खूबसूरत थी लेकिन उसके कपड़े फटे हुए थे और वह जोर-जोर से रो रही थी इस घने सुनसान जंगल में इतनी रात को जब सोमनाथ ने एक युवती को ऐसे रोते सिसकते देखा तो पहले तो वह बुरी तरह से घबरा उठा फिर किसी तरह वह हिम्मत करके ट्रक से नीचे उतरा और उस युवती के पास जाकर बोला त तुम कौन हो यहां इस जंगल में इस तरह से क्यों रो रही हो और तुम्हारे कपड़े ऐसे फटे हुए क्यों हैं सोमनाथ का सवाल सुनते ही युवती पहले तो और जोर-जोर से रोने लगी फिर रोते हुए ही वह कहने लगी मैं सुखिया हूं इस जंगल के पार वाले गांव की रहने वाली हूं मेरी सौतेली मां मुझे दिन रात मारती पीटती रहती थी और घर का सारा काम कराती थी फिर उसने पैसों के लालच में आकर मेरी सौतेली मां ने मेरी शादी एक बूढ़े आदमी से पक्की कर दी इसीलिए फिर मैं अपने घर से निकल भागी लेकिन बदकिस्मती से एक गुंडा बदमाश मेरे पीछे पड़ गया बड़ी मुश्किल से किसी तरह मैं उसके चंगुल से बच के निकल भागी और बचते बचाते यहां तक आ पहुंची लेकिन अब मैं कहां जाऊं किससे मदद मांगूं बस यही सोच सोच के मैं रो रही हूं सोमनाथ को उस मुसीबत की मारी युवती पर तरस आ गया और उसने उसे अपने ट्रक में बैठने के लिए कहा लेकिन सुखिया घबराई आवाज में बोली मैं तो जानती तक नहीं तुम्हें ऐसे कैसे तुम्हारे साथ जा सकती सोमनाथ ने मुस्कुराते हुए कहा मैं भी तुम्हारी ही तरह एक इंसान हूं यहां से थोड़ी दूर के गांव कौसानी में रहता हूं तुम चाहो तो मेरे साथ मेरे घर भी चल सकती हो मेरे बापू बहुत अच्छे आदमी हैं वह जरूर तुम्हारी मदद करेंगे और अगर तुम्हें कहीं और जाना हो तो मैं वहां छोड़ दूंगा तुम्हें सुखिया कुछ पल मन ही मन सोचती रही फिर सहमी हुई सी ट्रक में आकर बैठ गई सोमनाथ भी ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और उसने ट्रक स्टार्ट किया और सुखिया के बारे में सोचते हुए ट्रक चलाने लगा सोमनाथ का ध्यान सुखिया के चेहरे पर नहीं गया नहीं तो वह देखता कि अब सुखिया के चेहरे पर बड़ी ही अजीब सी मुस्कुराहट झलक रही है साथ ही उसकी आंखों में किसी बिल्ली की तरह ही चमक सी भर गई थी सखिया ट्रक में बैठी हुई अपनी लंबी पतली उंगलियों को धीरे-धीरे सोमनाथ की तरफ बढ़ा रही थी फिर अचानक ही एक जगह ट्रक को झटका साल लगा तो सुखिया ने लपक के अपने लंबे नाखून सोमनाथ के हाथ में चुभा दिए सोमनाथ को ऐसा लगा मानो किसी ने उसे नुकीली सुई चुभोना दर्द से चहक उठा लेकिन वह कुछ कहता कि इससे पहले ही सुखिया खुद ही अफसोस करती हुई सी बोली मैं माफ करना मुझे वो ट्रक को अचानक ही झटका सा लगाना तो पता नहीं कैसे मेरे नाखून आपके हाथ में जा चुभे सोमनाथ ने बिना कुछ कहे बस गर्दन हिला दी लेकिन सोमनाथ यह नहीं देख पाया कि सुखिया ने अपनी उंगली के नाखूनों में लगे सोमनाथ के खून को जुबान से चाट लिया जैसे ही सुखिया की जुबान को सोमनाथ के खून का स्वाद मिला कि उसकी आंखों की चमक एकदम से कई गुना बढ़ गई अब वह एकदम लालची नजरों से बार-बार सोमनाथ को घूर रही थी उसकी जुबान बार-बार होठों से बाहर लपल पासी रही थी सुखिया दरअसल कोई मजलूम दुखियारी लड़की नहीं बल्कि एक भयानक रक्त पिपासु डायन थी जो सोमनाथ जैसे युवकों को अपने जाल में फंसा के फिर उनका खून पीती थी वह तब तक उस युवक को अपने जाल में फंसाए रहती जब तक कि युवक के शरीर में एक बूंद भी खून की बची रहती सुखिया इस जंगल के अंदर वाले घने पेड़ों के बीच बनी अपनी एक गुफा में रहती थी जब कभी कोई गांव वाला या कोई लकड़हारा भूले भट के जंगल में चला आता तो सुखिया फौरन उसके पास चली आती और फिर मौका पाते ही उस उसके गले पर अपने दांत गड़ा के उसका खून पीने लगती जैसे ही सुखिया अपने दांत उस बेचारे आदमी की गर्दन पर गड़ा कि उस आदमी की आंखें धीरे-धीरे बंद होने लगती और वह कुछ ही देर में मर जाता लेकिन जब सुखिया को कोई एकदम जवान गर्म खून वाला युवक दिख जाता तो वह उसे ऐसे एक झटके में ना मार के अपना रुप बदल के उसके साथ हो लेती फिर बड़े धीरे-धीरे आराम से हर रोज उसका खून पीती और नई ताकत हासिल करती बड़े दिनों से सुखिया को कोई युवा गर्म खून पीने के लिए नहीं मिला था इसलिए वह खून पीने के लिए एकदम बेचैन हो तड़फ आती हुई जंगल में इधर-उधर घूम रही थी कि तभी उसकी निगाह ट्रक में सो रहे सोमनाथ पर गई बस फिर क्या था सुखिया ने फौरन सोमनाथ को अपने जाल में फंसाने की पूरी योजना बना ली और बेचारे सोमनाथ को इस तरह से अपने लपेटे में लिया कि वह तो सुखिया को अपने घर ले जाने के लिए ही तैयार हो गया सुखिया अपने मन में तरह-तरह के मंसूबे बांध रही थी कि वह सोमनाथ के गर्म ताजे खून को कब और कैसे पिएगोन अपने मन में सोच रहा था कि आज तो किस्मत ने उसे नौकरी के साथ-साथ एक खूबसूरत लड़की भी दे दी अब वह अपने बापू को राजी करके जल्द ही सुखिया से शादी करके अपना घर संसार बसा लेगा मन में खयाली पुलाव पकाते हुए सोमनाथ जब वापस ट्रक लेकर ठेकेदार के घर पहुंचा तो रात लगभग खत्म होने वाली थी ठेकेदार को ट्रक की चाबी सौंप के फिर सोमनाथ ने उससे साइकिल मांगी और साइकिल में सुखिया को बैठा के वह फिर अपने गांव कौसानी की ओर रवाना हो गया साइकिल की पिछली सीट पर बैठी सुखिया ने सोमनाथ के कंधे पर अपना एक हाथ बड़े जोर से दबाते हुए रखा था अपने घर के दरवाजे पर साइकिल रोग के सोमनाथ ने सुखिया को उतरने का इशारा किया और फिर खुद भी साइकिल से उतर के सुखिया को ले दरवाजे के पास आया दरवाजा खटखटा आते ही सोमनाथ की मां ने दरवाजा खोला तो सोमनाथ के साथ खड़ी एक अनजान युवती को देख वह एकदम हैरत में पड़ गई वह कुछ कहती कि सोमनाथ ने घर के अंदर आते हुए कहा मां यह सुखिया है बेचारी बेसहारा जंगल में इधर-उधर भटक रही थी मुझसे सहायता मांग रही थी तो मैं इसे तुम्हारी मदद के इरादे से घर ले आया अब यह सब काम कर दिया करेगी और तो तुम्हारा ख्याल भी रखेगी मां हैरानी से सुखिया को देखने लगी तो सुखिया झट से रोने का नाटक करती हुई मां के पैरों पर गिर पड़ी तभी बापू भी बाहर आ गए तो सोमनाथ ने उनके हाथ में ठेकेदार के दिए 000 रखते हुए कहा मुझे एक अच्छी नौकरी मिल गई है बापू हफ्ते में 5000 मिलेंगे एक हफ्ते के 5000 मिलने की बात सुनके तो बापू खुशी से झूम उठे फिर थोड़ा फिक्र मंद हो बोले लेकिन बेटा कहीं कोई उल्टा सीधा काम तो नहीं है ना इतने रुपए कौन दे रहा है सोमनाथ ने चारपाई पर बैठते हुए जवाब दिया कोई ऐसा वैसा काम नहीं है बापू आपको तो मालूम ही है ना इस पहाड़ी इलाके में गाड़ी ट्रक चलाने वाले लोगों की कितनी कमी है मैंने जो शौक के तौर पर गाड़ी चलाना सीखा था वही आज काम आ गया बाकी रात को जागने से अब मुझे बहुत नींद आ रही है कुछ घंटे सोने के बाद ही अब मैं दूसरा कोई काम करूंगा मां प्यार से बोली मैं मसाले वाली चाय बना देती हूं चाय पी के फिर सोना मां रसोई घर में जा रही थी कि सुखिया लपक के उनके पास आती हुई बोली अरे मैं अब आ गई हूं ना तो फिर मेरे रहते अब आपको एक तिनका तक तोड़ने की जरूरत नहीं है हर छोटा बड़ा काम मैं ही करूंगी चलिए मुझे बताइए कहां पर है रसोई घर कुछ ही देर में सुखिया सबके लिए गरमागरम चाय और मक्खन डली रोटी बना के ले आई फिर सबको चाय रोटी देते हुए वह मुस्कुरा के बोली सुबह-सुबह सिर्फ चाय नहीं पीनी चाहिए इसके साथ यह मक्खन वाली रोटी खाइए बदन में एकदम स्फूर्ति आ जाएगी सब खुशी-खुशी चाय रोटी खाने लगे फिर सोमनाथ आराम से सो गया उसकी मां थोड़ी देर बाद नहा धोकर अपने पड़ोसी के घर उसके नन्हे नाती को देखने चली गई और बापू सामान लेकर पास वाले बाजार में चला गया सुखिया को ऐसे ही मौके की तलाश थी उसने तुरंत घर का दरवाजा बंद किया और फिर गहरी नींद में सोए हुए सोमनाथ के पास आके उस पर झुक गई और पहले अपनी लंबी जीभ से उसकी गर्दन चाटने लगी सोमनाथ को नींद में ही जैसे एकदम बेहोशी ने आ घेरा और वह होशो हवास खो के बेसुध सा हो गया सुखिया ने तुरंत सोमनाथ की गर्दन पर अपने नुकीले दांत गड़ाए और फिर सपास वह सोमनाथ का खून पीने लगी जै से जैसे सुखिया खून पी रही थी उसके चेहरे का रंग एकदम सुर्ख लाल सा होता जा रहा था करीब 10 मिनट तक खून पीने के बाद फिर सुखिया सुकून भरी सांस लेती हुई उठ के खड़ी हुई और अपने होठों पर जीभ फेरती हुई वह सीधे अंदर कमरे में जाकर लेट गई एक डेढ़ घंटे बाद जब सोमनाथ की मां लौट के वापस आई तो उसने घर का दरवाजा बंद देख जोर से दरवाजा खटखटा हुए सोमनाथ को पुकारा मां की आवाज आते ही अंदर वाले कमरे में सोई सुखिया झपट के उठी और जल्दी से जाकर दरवाजा खोल दिया सोमनाथ की मां नाराज हो बोली इस गांव में दिन के समय कभी भी किसी के घर का दरवाजा बंद नहीं होता [संगीत] आइंद्र हो गया था वह धीरे से हामी भर के अंदर चली गई और घर के काम करने लगी सुखिया को यूं काम करते देख मां उसकी तारीफ करने लगी अरे तुम भी तो थोड़ा आराम कर लेती इस सोमनाथ को देखो कितनी गहरी नींद में सो रहा है सुखिया मुस्कुराती हुई बोली अरे मां जी मैं तो चार रात भी ना सोंगी तो भी मुझे कुछ भी नहीं होने वाला है मौ ने हंसते हुए उसे देख कहा हां वैसे तेरा चेहरा भी ताजा सेब जैसा सुर्ख लाल गुलाबी दिख रहा है उधर सोमनाथ के बापू जब कस्बे के बाजार में पहुंचे तो वहां अपने परिचित दुकान दुकानदारों को थोड़ा डरा सहमा सा देखा जब रामलाल ने उनसे डरने की वजह पूछी तो उनमें से एक दुकानदार ने घबराई सी आवाज में बताया आज सुबह-सुबह पास वाले जंगल से एक आदमी जड़ी बूटियां बेचने आया था कभी कभार वह छोटा टेंपो लेकर जंगल से सामान ढोने भी जाता है उसने बताया कि उस जंगल में आजकल एक बड़ी ही भयानक डायन का आतंक छाया हुआ है वह डायन रूप बदलने में माहिर है और तरह-तरह के रूप ल के उस जंगल में आने वाले युवकों को अपने जाल में फंसा के उनका खून चूस लेती है उस डायन की भयानक वहशत भरी बातें सुनकर हम सबके तो रोंगटे खड़े हो गए हैं तुम भी सुनोगे तो डर से कांप उठोगे वह बता रहा था कि मैं अपने टेंपो में कुछ सामान लेकर पास वाले शहर में जा रहा था उस दिन हमेशा मेरे साथ रहने वाला साथी तन्ना भी तबीयत खराब होने की वजह से मेरे साथ नहीं आया था मैं सुबह सब सबरे 6 बजे ही गांव से निकल गया था और शहर पहुंच के वहां पौ बजे माल उतार के वापस अपने गांव के लिए रवाना हो गया था करीब 11:30 बजे जब मैं अपनी टेंपो चलाते हुए जंगल में पहुंचा तो पता नहीं कैसे अचानक ही साफ खुले आसमान में काले काले बादल घिर आए और फिर कुछ ही पलों में एकदम घनघोर मूसलाधार बारिश शुरू हो गई बारिश इतनी भयंकर हो रही थी कि मुझे सामने रास्ता तक नजर नहीं आ रहा था इसीलिए फिर मैंने बारिश कम होने तक अपनी टेंपो रोकने में ही अपनी भलाई समझी टेंपो को सड़क किनारे खड़ी करके मैं उसकी ड्राइविंग सीट पर बैठ के ही बारिश कम होने का इंतजार करने लगा कुछ ही मिनट गुजरे होंगे कि तभी मेरी निगाह सामने वाले बड़े से पीपल के पेड़ की तरफ गई वैसे तो तेज बारिश की वजह से मुझे साफ-साफ कुछ नजर नहीं आ रहा था फिर भी मुझे ऐसा लगा कि उस पीपल के पेड़ के ऊपर कोई बैठा हुआ है यह एहसास होते ही मैं बुरी तरह से घबरा उठा क्योंकि इतने ऊंचे पेड़ के ऊपर और वह भी इस मूसलाधार बारिश में किसी का वहां जाकर बैठना कोई मामूली बात तो थी नहीं फिर अचानक ही जैसे जोर से बिजली कड़की और अगले ही पल कोई धड़ाम से मेरी टेंपो के बोनट पर कूद पड़ा बिजली के कड़कने से दो-चार सेकंड के लिए मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया और जब मेरी नजरें स्थिर हुई तो मैं डर के मारे इतना हतप्रभ हो गया कि कुछ पलों के लिए तो मेरी धड़कने तक थम स गई मेरी टेंपो के बोनट पर एक बेहद बदसूरत और भयंकर सी नजर आने वाली कोई चुड़ैल जैसी औरत खड़ी थी उस औरत की घड़ियाल जैसी आंखें और काले काले मोटे होठों से बाहर निकलते भेड़िए की तरह पहने नुकीले दांत जहरीले सांपों की तरह लहराते लंबे बाल और उसके उल्टे मुड़े हुए पैरों को देखकर बड़े से बड़े बहादुर व्यक्ति को भी घबराहट के मारे हार्ट अटैक आ जाता लेकिन मैं किसी तरह अपने घबराए दिल को संभालते हुए एक तक बस अपने टेंपो के बोनट की तरफ ही निहारे जा रहा था इतने में उस चुड़ैल ने एक भयानक कहकहा लगाया और दोनों हाथ हवा में लहराती हुई महा करकस स्वर में चीखती हुई बोली अब मैं इस जंगल से गुजरने वाले युवकों को अपना शिकार बना लूंगी अभी तो सिर्फ पांच छह युवक ही मेरा शिकार बने हैं पहले को तो मारने और उसे तड़पा तड़पा के उसका खून प ने में बहुत मजा आया लेकिन बाद में जो दूसरे युवक थे ना वह तो बहुत ही कमजोर दिल के निकले और मुझे देखते ही उसके दिल की धड़कन हमेशा हमेशा के लिए बंद हो गई ऐसे मरियल कमजोर लड़के का खून पीना तो मेरी शान के खिलाफ है इसीलिए मैंने उन्हें इस पेड़ के ऊपर ले जाकर हवा में उछाल के दूर फेंक दिया उस भयंकर चुड़ैल की बातों ने तो मेरे शरीर का सारा खून ही जमा दिया मैं बिल्कुल स्तब्ध हो उसकी बातें सुन रहा था तभी उस चुड़ैल ने अपने हाथ से मेरे टेंपो का सामने वाला शीशा फोड़ दिया और बड़े ही भयानक तरीके से अट्टहास लगाती हुई बोली मैं कोई ऐसी वैसी चुड़ैल नहीं हूं जो सिर्फ रात के अंधेरे में ही भटकती फिरती है मैं तो त्रिकाया हूं जो दिन की रोशनी में भी बड़े आराम से अपने शिकार को अपने कब्जे में ले सकती हूं तेरी किस्मत अच्छी थी जो तू उम्र में बड़ा है इसीलिए बच गया मेरी पकड़ से लेकिन अब जो भी युवक दिन के समय इस तरफ से गुजरेगा उसे मैं जरूर अपना शिकार बना केर ही दम लूंगी जाओ जाकर कह दो अपने गांव के लोगों से दम है तो मुझे रोक के दिखा दे मैं ऐसी डरपोक नहीं हूं जो चोरी छिपे रात के अंधेरे में अपना शिकार करूं मैं तो वह चीज हूं जिसने डरना घबराना तो सीखा ही नहीं है मुझे तो सामने से चुनौती देकर अपना शिकार करने में सुकून मिलता है चुड़ैल की बातें जैसे मेरे कानों में पिघलते शीशे की तरह उतर रही थी मैं इतना हक्का बक्का हो गया था कि अपनी जगह से हिल तक नहीं पा रहा था अपनी बात पूरी करके और गांव वालों को खुली चुनौती देकर वह चुड़ैल फिर अचानक ही किसी जंगली बिल्ली की तरह हवा में ऊपर उछली और वापस जाकर उसी पेड़ पर लटक के चमगादड़ की तरह झूलने लगी रामलाल को इतनी बात बता कि वह दुकानदार फिर खामोश हो गया रामलाल का दिल जोर से धड़कने लगा ऐसी भयंकर बात सुनकर घबरा उठा वह मन ही मन सोचने लगा उसका बेटा सोमनाथ भी तो कल रात उसी जंगल में गया था और आज सुबह अपने साथ एक अनजान सी लड़की को लेकर घर चला आया कहीं कहीं वो लड़की वहीं डायन ही तो नहीं है जो मेरे बेटे का खून चूसने के लिए रुप बदल के उसके संग चली आई है जब उन दुकानदारों ने रामलाल को इतना घबराए और सोच में डूबे देखा तो एक दुकानदार पूछ बैठा अरे अब तुम क्यों इतना सोच रहे हो तुम्हें देखकर तो लगता है कि उस डायन से तुम्हारी मुलाकात हो चुकी है रामलाल सहमी हुई आवाज में बोला क्या तुम में से किसी को यह पता है कि उस रुप बदलने वाली डायन की असली पहचान कैसे हो सकती है दुकानदार ने फौरन जवाब दिया ऐसी रुप बदलने वाली डायनों को तो बस एक ही तरीके से पहचाना जा सकता है और वह तरीका है कि उस डायन को दर्पण में देखने के लिए कहो डायन भले ही कितना भी रूप बदल ले लेकिन दर्पण में उसका असली डायन वाला रुप ही नजर आता है रामलाल का चेहरा एकदम खौफ से भर गया वह कांपते हुए सोचने लगा अगर सोमनाथ के साथ आई हुई लड़की सचमुच ही डायन निकली तो उसे कैसे वह काबू में कर पाएगा कहीं उस डायन ने पलट के उसे और उसके पूरे परिवार को ही खत्म कर दिया तो आखिर रामलाल ने उस कस्बे के सबसे बूढ़े और जड़ी बूटियों के जानकार व्यक्ति शंभुनाथ से सहायता लेने की सोची शंभुनाथ वहीं कुछ दूरी पर ही अपनी जड़ी बूटियों की दुकान सजाए बैठा हुआ था रामलाल ने उसके पास जाकर उसे एक बीड़ी दी और फिर नमस्कार करते हुए बोला शंभो काका एक बात पूछनी थी और कुछ सलाह भी लेनी थी आपसे बड़ी मुश्किल में फंस गया हूं काका अब आप ही कुछ मदद कर सकते हैं शंभू काका ने बीड़ी सुलगा हुए कहा क्या हो गया रे रामलाल क्यों इतना परेशान हो रहा है तू क्या पैसों वैसों का कुछ मामला हो गया लाल हाथ जोड़ते हुए बोला रुपए पैसों की बात नहीं काका मेरे पूरे परिवार पर जान का संकट आ गया है मुझे शक है कि एक रुप बदलने वाली डायन कल रात मेरे घर में चली आई है शंभू काका के चेहरे पर फिक्र झलक लगी फिर उन्होंने अपनी दुकान में रखी हुई जड़ी बूटियों में से एक बूटी उठाकर रामलाल को दी और गंभीर स्वर में समझाया इस बूटी को ले जाकर अपने घर के बीचोंबीच रख देना अगर उस घर में स मुछ ही डायन हुई तो कल सुबह तक इस बूटी का रंग एकदम सुर्ख लाल हो जाएगा अगर कल इस बूटी का रंग लाल हो गया तो फिर तुम फौरन इसे एक कपड़े में लपेट के मेरे पास ले आना उसके बाद फिर मैं बताऊंगा कि आगे क्या किया जा सकता है रामलाल तो एकदम से शंभो काका के चरणों में गिर पड़ा फिर वह बूटी संभाल के अपने कुर्ते की जेब में रख ली और जल्दी-जल्दी चलते हुए कुछ ही देर में अपने घर जा पहुंचा हाते कांपते जब रामलाल अपने घर में घुसा तो सोमनाथ तब भी गहरी नींद में ही था जब रामलाल की बीवी ने अपने पति को ऐसी बदहवास हालत में देखा तो वह घबरा के बोली अरे आप इतनी जल्दी और ऐसी बेहाल सी हालत में कैसे आ रहे हैं तबीयत ठीक है ना आपकी रामलाल हांफ हुए बोला पानी एक लोटे में पानी दो पहले फिर मैं सब बताता हूं पूरे लोटे का पानी गटकनेक्ट चलने के लिए कहा जब दोनों घर के बाहर आ गए तो रामलाल दबी हुई आवाज में बोला कल रात जिस लड़की को लेकर सोमनाथ हमारे घर आया है वह मुझे कुछ ठीक नहीं लग रही है तुम उस लड़की से घर का कोई काम मत करवाना और उससे दूर ही रहना अब तो रामलाल की बीवी घबराहट के मारे सूखे पत्ते की तरह कांपने लगी फिर अटकती जुबान से किसी तरह बोली मैं अभी जाकर उस लड़की की छोटी पकड़ के घर से बाहर निकाल देती हूं रामलाल ने तुरंत अपनी बीवी को ताकीद दी ऐसी गलती तो भूले से भी मत करना नहीं तो हम सबकी जान पर बनाएगी तुम बस मेरी बातों पर अमल करो और खुद ही घर के सारे काम करो उसकी बीवी ने किसी रोबोट की तरह हामी भर दी और फिर अपने घर के अंदर चली आई तब सुखिया डायन रात के खाने के लिए कुछ साग सब्जियां काटने में लगी थी रामलाल की बीवी ने सपाट लहजे में कहा साग सब्जियों को रहने दे मैं खुद ही का काट लूंगी और खाना भी बना लूंगी मेरे पति और बेटे को मेरे ही हाथों का बना खाना पसंद आता है तुम जंगल जाकर चूल्हा जलाने के लिए लकड़ियां इकट्ठी करके ले आओ रामलाल की बीवी ने कुछ ऐसे लफ्जों में अपनी बात कही कि सुखिया को फिर घर से निकल के जंगल जाना ही पड़ गया सुखिया के घर से बाहर निकलते ही अब तक गहरी नींद में सो रहा सोमनाथ अचानक ही अपनी गर्दन सहला हुए उठ के बैठ गया उसने दर्द से कराहते हुए अपनी मां से कहा यह मेरी गर्दन में कुछ सुई चुभने जैसा तीखा दर्द क्यों हो रहा है उसकी मां और बापू दोनों ही लपक के उसके करीब आए और गौर से सोमनाथ की गर्दन को देखने लगे तो उन्हें गर्दन के निचली तरफ दांतों के दो निशान से दिखाई दिए ऐसे निशान मानो किसी सांप ने डं सा हो सोमनाथ को सोमनाथ की मां घबरा के रोती हुई बोली अरे अरे यह क्या हो गया मेरे बेटे को इसकी गर्दन पर यह निशान कैसे आ गए रामलाल ने पहले तो अपनी जेब से वह बूटी निकाल के घर के बीचोंबीच रखी फिर सहमी हुई आवाज में बोला इस बूटी को ना तो कोई हाथ लगाएगा और ना इधर उधर उठाकर रखेगा और सुन ले सोमनाथ तू जल्दी से उठक हाथ मुंह धो और कपड़े बदल के तुरंत ही अपने दोस्त सूरज के घर चला जा जब तक मैं ना बुलाऊं तब तक तू घर के आसपास भी ना भटकना समझ गया ना अब जा निकल जल्दी से इससे पहले कि वह लड़की वापस यहां आ जाए वह लड़की जरूर कोई खतरनाक इरादा लिए हमारे घर पर आई है सोमनाथ हक्का बक्का हो गया लेकिन उसके बापू ने जिस तरह से उससे बात की थी सोमनाथ इंकार नहीं कर सका और चुपचाप उठ के जल्दी-जल्दी तैयार हो अपने दोस्त सूरज के घर चल दिया सुखिया जब जंगल से लकड़ियां लेकर आई तब तक रामलाल ने आज रात भर अपने और अपनी बीवी के बचाव की पूरी तैयारी कर ली थी उसने अड़ोस पड़ोस से दो तीन परिवारों को रात में देवी जागरण के नाम से बुला लिया था घर के बाहर एक दरी बिछा के और बीचों बीच एक बड़े से लोहे के तसलेट सब लोग उस आग के इर्दगिर्द ढोलक मंजीर लेकर बैठ गए थे रामलाल की बीवी ने गुड़ और मसाले डाल केर ढेर सारी चाय बना के आग के पास ही रख ली थी सुखिया ने जब वहां इतनी भीड़भाड़ और शोर शराबा देखा तो घबरा उठी उसने तो सोचा था कि आज रात वो दोबारा से सोमनाथ का खून चूसे गी ऊपर से देवी जागरण की वजह से डायन का दम वहां पर घुटने सा लगा वह एकदम से छटपटा हुई रामलाल के घर के पिछवाड़े में चली गई रामलाल ने जब देखा कि सुखिया घर के पिछवाड़े की ओर गई है तो उसने तसल्ली भरी सांस ली और जोर शोर से भजन गाने में लग गया सुबह की पहली किरण निकलने तक सब लोग वहीं बैठे भजन गाते बजाते रहे और फिर सुबह होते ही देवी मां की जय जयकार लगाते हुए अपने-अपने घर की ओर रवाना हो गए रामलाल जब घर के अंदर दाखिल हुआ और उसकी नजर उस बूटी पर पड़ी तो वह डर से कांप उठा शंभो काका की दी हुई उस बूटी का रंग खून की ही तरह सुर्ख लाल हो चुका था रामलाल ने कांपते हाथों से वह बूटी एक कपड़े में लपेटी और तेजी से भागते हुए शंभो काका से मिलने के लिए रवाना हो गया लेकिन जाने से पहले उसने अपनी बीवी को पड़ोस में जाने के लिए कह दिया जब शंभु काका ने वोह बूटी देखी तो उनकी आंखों में भी घबराहट झलक लगी उन्होंने फिर घबराई आवाज में कहा तुम्हारे घर में तो वह महा भयंकर त्रिकाया डायन घुसाई है सोमनाथ डर से थरथरा हुए बोला या यह त्रिकाया डायन कौन है काका शंभो काका ने धीरे से कहना शुरू किया त्रिकाया डायन एक बहुत ही पुरानी और शक्तिशाली डायन है जो उस जंगल में रहती है वह जंगल में आने जाने वाले लोगों खास तौर पर युवकों का खून पी लेती है त्रिकाया डायन की शक्ति बहुत ही अधिक है और वह जवान युवकों का खून पीने के कारण और भी ज्यादा ताकतवर और डरावनी बनती जा रही है वह अपने शिकार को बहुत ही आसानी से पकड़ लेती थी और फिर उसका खून पी लेती थी तुम्हारी किस्मत अच्छी है जो तुम फौरन मेरे पास चले आए आज दोपहर बाद सूर्य ग्रहण होने वाला है ग्रहण के काल में तो डायन की ताकत कई गुना बढ़ जाती है तब उसे कि किसी भी तरह से काबू में नहीं किया जा सकता अब हमें ग्रहण लगने से पहले ही उस डायन के खात्मे का प्रबंध करना पड़ेगा नहीं तो सर्वनाश हो जाएगा सर्वनाश रामलाल ने गिड़गिड़ा हुए कहा अब तो मुझे ऊपर वाले और आपका ही सहारा है जो भी आप कहोगे मैं वही करूंगा शंभू काका ने फिर तुरंत अपनी थैली में जड़ी बूटियां रखी और साथ में एक बड़ी सी मजबूत रस्सी और एक कुल्हाड़ी रामलाल को पकड़ा दी फिर उसने आसपास के कुछ दूसरे दुकानदारों को भी समझा बुझा कर इकट्ठा किया और उन्हें और रामलाल को लेकर जल्दी-जल्दी चलते हुए उस जंगल की ओर रवाना हो गया वे सब झूठ बना के जंगल के अंदर और अंदर जाते ही गए अचानक ही उन्हें वहां एक बहुत ही सुंदर नाजुक सी लड़की दिखाई दी जो अपना एक पैर पकड़े रो रही थी उस झुंड में सबसे आगे चल रहे रामलाल ने देखा कि पैर में मोच आने की व ज से वो लड़की दर्द से रो और कराह रही थी उसके पैर में इतनी तकलीफ थी कि उसे खड़े होते तक नहीं बन पा रहा था इसीलिए रामलाल ने फिर आगे बढ़कर उस लड़की को सहारा देना चाहा लेकिन अभी रामलाल ने उस लड़की का हाथ पकड़ा ही था कि शंभू काका जोर से चिल्लाए उस भयानक बला को धकेल के दूर फेंक दो और जल्दी से दौड़ के मेरे पास आओ रामलाल ने हैरानी से शंभो काका की ओर देखते हुए कहा यह आप क्या कह रहे हैं इस बेचारी लड़की के पैर में चोट आई है इसे इलाज और आराम की सख्त जरूरत है काका गुस्से से चीखे ओह तुम बेवकूफी मत करो और जल्दी से उस बला को फेंक दो और बिना उधर देखे भागते हुए चले आओ इधर लड़की अचानक ही उछल के रामलाल की बाहों में आ गई रामलाल को अचानक से महसूस होने लगा मानो उसकी बाहों में लेटी फूल सी नाजुक लड़की का वजन तेजी से बढ़ता चला जा रहा है कुछ पलों में उस लड़की का वजन इतना ज्यादा हो गया कि रामलाल के लिए उसको अपनी बांहों में उठाए रखना तक मुश्किल हो गया यही नहीं लड़की ने अब अपनी बाहों को रामलाल के इर्दगिर्द इस तरह से कस लिया था कि उसका तो जैसे दम ही घुटने लगा अब तो रामलाल डर और हैरानी से एकदम पागल सा हो उठा उसने अपना पूरा जोर लगा के किसी तरह लड़की को अपनी बांहों से अलग किया और फिर पूरी ताकत लगा केर उसे नीचे जमीन पर फेंक दिया जैसे ही वह लड़की नीचे जमीन पर गिरी कि अचानक ही उसकी शक्लो सूरत तेजी से बदलने लगी उसका खूबसूरत चेहरा एकदम से किसी भयंकर डायन के रूप में बदल गया उसके लंबे सुनहरे बाल एकदम कंटीली सी जटाओं में बदल गए और वह देखते ही देखते एक खूबसूरत नाजुक लड़की से एक महा भयंकर डरावनी डायन बन गई डायन ने अपने उल्टे मुड़े पैरों को जोर से झटका और हवा में ऊपर उछल के सीधे जोर-जोर से अट्टहास लगा ने लगी लड़की का यह डरावना रूप देख के और दिल दहला देने वाला उसका अट्टा हास सुनके घबराहट के मारे रामलाल के दिल की तो धड़कने ही जैसे कुछ पलों के लिए बंद सी पड़ गई वह अब सूखे पत्ते की तरह थर थर कांपने लगा उसके पैरों में जैसे यहां से भागने की कोई शक्ति ही नहीं बची थी फिर उस डायन ने भेड़िए की तरह अपना मुंह ऊपर उठा के भयानक सी कर्कश आवाज में हूहू हूहू की ध्वनि निकाली और चंद पलों में उसका शरीर किसी बड़े विशालकाय और भयंकर भेड़िए के रूप में बदल गया अब वह विशालकाय भेड़िया अपने बड़े-बड़े नुकीले दांत दिखाते हुए आगे बढ़ा और फिर उसने सामने खड़े रामलाल की ओर छलांग लगा दी लेकिन अभी वह भयंकर भेड़िया उछल के रामलाल के करीब पहुंच पाता कि तभी बिजली की तेजी से लपक हुए शंभो काका ने झपट्टा सा मार के हक्के बक्के खड़े रामलाल को तेजी से अपनी तरफ खींच लिया एक के बाद एक इन हैरत अंगेज और दिल दहला देने वाली घटनाओं ने रामलाल और दुकानदारों को जैसे बुत बना दिया था फिर भी किसी तरह हिम्मत जुटा हुए रामलाल ने काका का सहारा लिया और अभी लड़खड़ाते हुए वह संभल ही रहा था कि वह भयानक भेड़िया दौड़ते हुए उसकी तरफ आने लगा तभी शंभू काका जोर से चिल्लाए तुम जल्दी से उस सामने दिख रहे टीले के पास पहुंचो और वहां से दो अंजुल मिट्टी लेकर दो गोले बना केर मेरी तरफ फेंको जल्दी कहीं देर ना हो जाए रामलाल को कुछ समझ में नहीं आया लेकिन फिर भी वह किसी मशीन की ही तरह ही उस टीले की ओर अंधा धुंध भागने लगा और फिर जैसे ही वह उस टीले से मिट्टी उठाने लगा कि अचानक ही ऊपर टीले से भयंकर गड़गड़ाहट की आवाज आने लगी रामलाल ने बिजली सी फुर्ती दिखाते हुए दो अंजुली मिट्टी उठाई और तेजी से उसके दो गोले बना के अपनी ओर भागते चले आ रहे शंभू काका की तरफ फेंक दिया काका ने किसी कुश बलर की तरह उन दोनों गोलों को कैच किया और उसे उस महा भयानक भेड़ी की ओर तेजी से उछाल के मार दिया गोला लगते ही भेड़िया चिल्लाता हुआ अचानक ही गायब हो गया उस भेड़िए के गायब होने के बाद शंभो काका हाफ हुए बोले अब हमें पल-पल पर खतरा है बहुत हिम्मत से काम लेना होगा फिर शंभो काका उन्हें लेकर उस जगह पहुंचे जहां भेड़िए की शक्ल जैसा ही एक मिट्टी का टीला बना हुआ था उस मिट्टी के टीले के चारों तरफ जहरीले सांपों के बिल बने हुए थे शंभू काका ने रामलाल और दूसरे दुकानदारों को टीले से थोड़ा पीछे जाने के लिए कहा और खुद उस टीले के चारों ओर जड़ी बूटियां फैलाने लगे कुछ ही मिनटों के अंदर उस टीले के चारों तरफ बने बिलों से सांप तिल मिलाते हुए निकल निकल के बाहर आने लगे और झाड़ियों में घुसने लगे जब सारे सांप बाहर निकल आए तो शंभू काका ने रामलाल को कुल्हाड़ी से उस मिट्टी के टीले को तोड़ने के लिए कहा डरते डरते रामलाल ने उस टीले पर कुल्हाड़ी से कई वार कर दिए अचानक ही आसमान में काले-काले बादल घिर आए तेज हवाएं चलने लगी इतनी तेज कि उन हवाओं में उड़ते पत्ते और धूल की वजह से रामलाल और वहां मौजूद बाकी लोगों को अपनी आंखें बंद करनी पड़ी अचानक ही वह पूरा टीला एकदम से टूट के बिखर गया और उसके अंदर से एक बड़ा ही भयानक और विशाल काय गिद्ध पंख फड़फड़ा हुए ऊपर आया और इतनी भयंकर और कर्कश आवाज में चीखने लगा कि सबके कान के पर्दे फटने से लगे सबने घबरा के अपने अपने कानों पर हाथ रख लिए इतने में जाने कहां से कई दर्जन गिद्ध उड़ते हुए वहां चले आए और बड़ी तेजी से आसमान से उतर के नीचे खड़े लोगों पर अपनी नुकीली चोंच और पंजों से हमला करने लगे सब लोग हाथ पैर मारते हुए चीखते चिल्लाते इधर-उधर भागने लगे तभी शंभो काका ने जोर से चिल्ला के कहा तुम सब अपनी-अपनी जगह पर ही खड़े रहो किसी को कुछ नहीं होगा कुछ ही देर में यह सारे गिद्द यहां से गायब हो जाएंगे लेकिन अगर तुम लोग इधर-उधर भागे तो टीले से निकला विशाल गिद्ध एक-एक करके तुम सबको खा जाएगा वह विशाल काय गिद्ध दरअसल उस भयंकर डायन त्रिकाया की काली शक्ति है अगर हम हिम्मत से काम लेंगे तो सब ठीक हो जाएगा अब सब लोग किसी तरह से हिम्मत जुटा के अपनी-अपनी जगह पर खड़े हो गए सचमुच कुछ ही पलों में उन लोगों पर हमला करते गिद्ध सब हवा में गायब हो गए सबने थोड़ी राहत की सांस ली ही थी कि अचानक ही जिस टीले से वह विशाल काय गिद्ध निकला था उस टीले के चारों ओर अजीब सी सुगबुगाहट सी होने लगी रामलाल ने घबराकर जल्दी-जल्दी पीछे हटने की कोशिश की लेकिन अभी वह अपनी कोशिश में कामयाब हो पाता कि इतने में नीचे जमीन के अंदर से दो भयानक से पंजे निकले और उन पंजों ने रामलाल को इस तरह से जकड़ लिया कि वह अपनी जगह से हिल तक नहीं पा रहा था और तभी उस जंगल के एक कोने में वही डायन खड़ी नजर आई जिसे कुछ देर पहले ही उसने अपने घर में देखा था लेकिन इस वक्त वह डायन अपने महा भयंकर रूप में थी अपने बाल बिखरा आए और दहकती लाल अंगारे जैसी आंखों को चमकाते हुए वह धीरे-धीरे रामलाल की तरफ ही बढ़ते हुए आ रही थी रामलाल अब पूरा जोर लगाकर चिल्लाया बचाओ कोई तो बचाओ नहीं तो यह डायन मुझे खा जाएगी लेकिन अभी कोई कुछ करता कि तभी गिद्ध की दोनों आंखें किसी जलते हुए अंगारे की तरह ही दहक लगी और वह बड़ी ही वहशत भरे अंदाज में आगे की तरफ बढ़ने लगा एक तरफ गिद्ध और दूसरी तरफ से डायन को अपनी ओर बढ़ते देख रामलाल की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई वह दहशत के मारे थर थर कांपने लगा डायन ने गुर राती हुई आवाज में कहा क्यों क्यों मुझसे शत्रुता लेने की हिम्मत की तुमने जवाब दो कैसे हुई तुम्हारी हिम्मत मेरे शक्ति रूप इस गिद्ध को जगाने की रामलाल घबराकर रोने लगा उसे रोते देख डायन जोर-जोर से कहकहे लगाने लगी फिर उसने झपट्टा मारकर रामलाल के बाल पकड़ लिए और भयंकर स्वर में चीखी त्रिकाया के कामों में बाधा डालने वाला इंसान जिंदा नहीं बच पाता तुम जैसे मामूली कीड़े मकोड़े तो मेरे इस गिद्ध की खुराक बनेंगे और फिर मैं तुम्हारे बेटे का एक-एक बूंद खून पी के और भी शक्तिशाली बन जाऊंगी बाल खींचने से रामलाल के सिर में तेज दर्द होने लगा वह डायन की पकड़ से अपने बालों को छुड़ाने की पुरजोर कोशिश करने लगा पर डायन की पकड़ तो जैसे और भी कसती ही जा रही थी रामलाल अब दर्द से कराहते हुए चिल्लाया मुझे बचाओ काका जल्दी आओ यहां यह डायन तो मुझे आज खा ही जाएगी डायन अपना चेहरा ऊपर करते हुए किसी जंगली खूनी भेड़िए की तरह हू हह हू करती हुई चिल्लाने लगी वहां खड़े दूसरे दुकानदारों का तो डर के मारे जैसे खून ही सूख गया था वे सब एकदम घबराई नजरों से उस डायन को घूरे जा रहे थे डायन अपनी आंखें नचाते हुई बोली एक बार जो त्रिकाया की पकड़ में आ गया फिर वह बचकर नहीं जा सकता अब तो तुम्हें यहीं रहना होगा मेरे इस वफादार गिद्ध के साथ अब से तुम लेकर आया करोगे मेरे और मेरे गिद्ध के लिए नए-नए शिकार रामलाल डर के चिल्लाया काका कुछ तो करो आप क्या मुझे इस डायन और उसके गिद्ध का शिकार बनाने के लिए लेकर आए थे यहां पर काका तो बस एकदम दम साध के सांस रोके बस ऊपर आसमान की ओर ताक रहे थे उन्हें इंतजार था उस पल का जब ग्रहण लगने से पहले की प्रक्रिया शुरू होती क्योंकि इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह की काली शक्तियों की ताकत एकदम से कम हो जाती है उधर रामलाल डरक बेहोश होने लगा अचानक ही उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उसे बर्फ की सिल्ली पर लिटा रहा हो बेहोशी में भी उसे इतनी ठंडक सी महसूस हुई कि उसने अपने हाथ पैर सिकोड़ना चाहे पर पर यह क्या उसके तो दोनों हाथ और दोनों पैर बड़ी ही मजबूती से जमीन से निकले भयानक पंजों में जकड़े हुए थे रामलाल पूरी तरह से होश में आते हुए ठंड से ठिठुर लगा फिर वह जोर से चिल्लाया मुझे ठंड लग रही है मुझे चाओ यहां से कोई तो छुड़ाओ अचानक ही आसमान में अजीब सी सुनहरी लाल रोशनी छा गई उस रोशनी में रामलाल ने देखा कि वह डायन अब किसी कंकाल की तरह दिख रही थी रामलाल की तो जैसे रूह कांप उठी और तभी जंगल में एक अजीब तरह का कोलाहल होने लगा मानो सैकड़ों आत्माएं छटपटा हुई चीख रही हो और फिर रामलाल के सामने बैठा हुआ गिद्ध जोर-जोर से अपने पंख फड़फड़ाने लगा और फिर देखते ही देखते वह गिद्ध गायब हो गया इसी समय शंभू काका ने अपने पास रखा एक बड़ा सा चाकू निकाला और आगे बढ़कर रामलाल की उंगली काटकर उसमें से बहते खून को त्रिकाया के कंकाल पर छिड़कने लगे इतने में एक भयानक काली आधी सी चारों तरफ चलने लगी इतने में कंकाल बनी हुई त्रिकाया की भयानक रूह ने अब अपना भयंकर रूप दिखाना शुरू किया शंभो काका अब पूरी तरह दिल मजबूत कर जोर-जोर से मंत्र पढ़े जा रहे थे उन्होने अपने हाथ में पकड़े चाकू को अब जैसे ही त्रिकाया के गले पर लगाया और एक झटके से वह चाकू पूरा का पूरा उस डायन के गले में उतार दिया त्रिकाया एकदम दिल दहला देने वाली आवाज में चीखती हुई बोली मुझे मारना इतना आसान नहीं है मैं कोई मामूली डायन नहीं जो इस चाकू से मर जाऊंगी शंभू काका ने लपक कर उस डायन की छुटियां पकड़ी और फिर बाकी दुकानदारों को आगे आने के लिए पुकारा पहले तो वे सब दुकानदार घबरा आ गए लेकिन फिर जब शंभो काका ने उन्हें हिम्मत बंधते हुए तुरंत आगे आकर मदद करने के लिए कहा तो फिर किसी तरह डरते हुए वे सब दुकानदार आगे आए और उन सबने फिर डायन को पकड़ के वहां सामने ही टीले की बिखरी हुई मिट्टी के ढेर में पटक दिया शंभू काका ने जब ऊपर देखा तो ग्रहण शुरू होने ही वाला था उन्होंने बेचैन होकर सबसे जल्दी-जल्दी लकड़िया लाने के लिए कहा और फिर उन सब लकड़ियों को जमीन पर मिट्टी के ढेर में पड़ी डायन के ऊपर रख के उन लकड़ियों में आग लगा दी आग लगते ही वह डायन बुरी तरह से तड़फ आती हुई उठने की कोशिश करने लगी लेकिन शंभू काका ने दुकानदारों के साथ मिलकर उस पर ऊपर से भी जलती लकड़ियां डालना जारी रखा देखते ही देखते डायन की चीख से सारा जंगल दहल उठा अब शंभु काका ने एक जलती हुई लकड़ी उठाई और उस तरफ बढ़े जहां रामलाल को जमीन से निकले भयानक पंजों ने जकड़ रखा था उस जलती लकड़ी से उन पंजों पर जब शंभो काका ने वार करना शुरू किया तो कुछ ही सेकंड में रामलाल को जकड़े पंजे वापस जमीन के अंदर समा गए शंभू काका ने उस जमीन पर अपनी जड़ी बूटियां बिखेरते हुए कहा अब यह पंजे कभी भी जमीन से बाहर नहीं निकल पाएंगे तभी ग्रहण लगना शुरू हो गया चमकता सूरज अब अपनी रोशनी खोने लगा लेकिन शंभू काका की समझदारी और रामलाल और उसके साथी दुकानदारों की हिम्मत ने हमेशा हमेशा के लिए उस भयानक डायन के वजूद का नामो निशान मिटा दिया था सब लोग जंगल से वापस गांव पहुंचे और फिर शंभू काका ने सोमनाथ के गले में लगाने के लिए भी एक लेप भी दिया कुछ ही दिनों बाद फिर रामलाल ने अपने घर में एक बड़ी दावत रखी जिसमें शंभू काका और साथी दुकानदारों के साथ ही अपने पूरे गांव के लोगों को बुलाया आखिर उसका इकलौता बेटा उस भयानक डायन के चंगुल में आके भी बच जो गया था सोमनाथ को भी सारी जिंदगी के लिए एक सबक मिल गया था कभी भी जल्दबाजी में किसी भी अनजान लड़की या लड़के पर भरोसा नहीं करना चाहिए वह तो उसकी किस्मत अच्छी थी जो वह उस भयानक डायन का शिकार होने से बच गया लेकिन किस्मत हर बार तो इंसान का साथ नहीं देती ना इसीलिए अच्छा यही है कि हम पहले से ही संभलकर और पूरी तरह से सोच समझ के ही कोई का करें हालांकि आज के समय में आपको इतनी चीज देखने को नहीं मिलेगी और यह जो स्टोरी थी वह बहुत समय पहले की है जब देश में ट्रक ड्राइवर्स को एक अच्छी खासी जॉब माना जाता था हालांकि आजकल ट्रक ड्राइवर की हालत बहुत ही खस्ता चल रही है हम जितना समझते हैं कि ट्रक ड्राइवर बहुत पैसा कमाते हैं तो आपको बता दूं कि यह इतना ही कमा पाते हैं कि अपनी रोजी रोटी चला सके यह टाटा अंबानी की तरह करोड़ पति नहीं बन पाते हैं फिर भी इनके लाइफ बहुत ही स्ट्रगल से भरी हुई होती है कई-कई बार तो 18 से 20 घंटे दिन भर ट्रक चलाते हैं ऐसे में आप समझ सकते हैं कि उनकी हालत क्या होती होगी और जब ऐसी हालत हो रही हो और उसमें भी अगर ऐसी चीजें इनके सामने घटित हो जाएं अचानक से हाईवे पर कुछ छलावा मिल जाए या और कोई अदृश्य चीज इनके ऊपर अटैक कर दें तो उन चीजों से बच पाना बहुत ही मुश्किल भरा होता है अगर आपका औरा मजबूत है तो हो सकता है ये चीजें आपसे दूर हट जाएं तो इनसे बचने का यही तरीका है कि अपने ओरे को मजबूत रखें और इसके लिए जरूरी है कि आप भगवान की शरण में रहे तभी आपका औरा मजबूत बनेगा आप भले ही कोई से भी धर्म से हो अगर आप सिख हैं तो गुरु गोविंद साहिब की शरण में जाइए अगर आप मुस्लिम है तो अल्लाह का नाम कीजिए और हिंदू धर्म में है तो जिस नाम से आप भगवान को पुकारना चाहें उस नाम से पुकार ले चलिए मैं समझता हूं आपको यह स्टोरी काफी अच्छी लगी होगी और अगर आपने आखिर तक स्टोरी सुनी है तो मुझे जरा सा यह बता दीजिए कि पहली बार उस चुड़ैल से शंभूनाथ की मुलाकात कब हुई थी चलिए अब अपने कुछ फ्रेंड्स के नाम देते हैं नदीम नोएडा उत्तम रेड दौसा पूनम मिश्रा निधि अलवर राजस्थान नसीम कादरी मुंबई अनिल वासव सूरत सोनाली मुंबई चौबे बलिया फातिमा शेख सोलापुर रिंकू वृंदावन अच्छा तो मिलता हूं अगले हॉरर अनुभव के साथ




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